खौज:
अवशैष बचै है शैष शब्द,
जो मौन से मौम है, फ़ानी है
भरम चक्षु धूंध ताप रहै है
जौ धूल कै बिम्ब थे, बानी है
अभिनन्दन किस खौज का मानष
वंदन कैसी वैदि है
भंजन कुंद बजर भंगम का
अवलंम्बन की हानी है !
अवशैष बचै है शैष शब्द,
जो मौन से मौम है, फ़ानी है
भरम चक्षु धूंध ताप रहै है
जौ धूल कै बिम्ब थे, बानी है
अभिनन्दन किस खौज का मानष
वंदन कैसी वैदि है
भंजन कुंद बजर भंगम का
अवलंम्बन की हानी है !
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