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घर का मोल वो समझाता हैं जिसने दुनिया में
खुले आसमां के नीचे ठिठुरती रातें गुजारी हो
किस्मत को वो शख्स न कोसता कभी जहां में
कड़ी मेहनत कर के ही यहाँ तकदीर संवारी हों
वो नहीं करता फिर खुदा राम पे कोई बहस भी
जिसने ब्रह्म की व्यापकता एक बार निहारी हों
वो न करता कभी मिलने की कोशिश सनम से
एक बार देख के जिसने सुरत दिल में उतारी हो
मौत से वो नहीं डरता करता सजदा खुदाई को
जिसने महोब्बत में अपनी ज़िन्दगी ख़ुद हारी हो
न करता हसीना की मीठी बातों पर कभी यकीं
जिसे अपने दिल का सूकून ओ ज़िन्दगी प्यारी हो
खुले आसमां के नीचे ठिठुरती रातें गुजारी हो
किस्मत को वो शख्स न कोसता कभी जहां में
कड़ी मेहनत कर के ही यहाँ तकदीर संवारी हों
वो नहीं करता फिर खुदा राम पे कोई बहस भी
जिसने ब्रह्म की व्यापकता एक बार निहारी हों
वो न करता कभी मिलने की कोशिश सनम से
एक बार देख के जिसने सुरत दिल में उतारी हो
मौत से वो नहीं डरता करता सजदा खुदाई को
जिसने महोब्बत में अपनी ज़िन्दगी ख़ुद हारी हो
न करता हसीना की मीठी बातों पर कभी यकीं
जिसे अपने दिल का सूकून ओ ज़िन्दगी प्यारी हो
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