Hindi Urdu Poetry 4 - Shakti Bareth

यह रौशनी अभी हुई , मेरी चंद इबादतों के बाद 
क्या अजीब ख्याल है , कमबख्त जाता ही नहीं !!
‪#‎शक्ति‬ बारेठ

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