Hindi Urdu Poetry 5 - Shakti Bareth

वो डरना भी क्या डरना
जिसमें नया सवैरा हौता हौ
वौ रात नहीं कहला सकती
जहां चांद बसेरा हौता हौ !
‪#‎बारैठ‬ ‪#‎डर‬ से बहारां बाजिंदा smile emoticon

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