Kabir - Rahim Poetry - Shakti Bareth Lyrics

नां तुं रहीमन ना है कबीरा, है तुं कंवली छाया रै,
जग जीतै पर जीत मिले ना, कैसी मुलमुल माया रै,
काबा जा ले घूम ले काशी, रब नां बन्दै पाया रै,
जात बदल चाहै धर्म बदल ले, चैहरा दैख पराया रै !
बंद करकै पलकें चल दिये...
कई खौज रहै पतवार,
कई आईनों की आड में....
जग रीत का करे बिचार !
‪#‎शक्ति‬ बारैठ

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