में कौन हुं? :
"अध्यनरत हुं, पर यह मालूम हो चला है, में (आप भी) एक अनवरत और निरन्तर यात्रा पर है".
बेसिक सा रास्ता है, पर विरां है, अनाम है, सुदूर है, कठीन भी है और असंभव भी ! तो फिर संभव क्या है?
संभव है हम, और तुम !
जब महिनों की दैखभाल के बाद भी पौधे के फूल नहीं लगते तो वह उस पौधे के लिऐ असंभव है, पर आखिर हम इंतजार करते है, कुछ और पौधे उगायेंगै, जौ विकट था, वहीं विश्वास के फलित हौने तक इंतजार करेंगे !
अगर यात्रा शुरू हुई है, तो निरन्तर चलेंगे, अनवरत चलेंगे | कौई किसी के लिऐ टेढे मेढे रास्तों के सिवा कुछ नहीं छोडकर चलता | बस उन्ही पर दांये बांये पैर रखकर नई पगडंडियां बनाकर चलना है |
#शक्ति बारैठ
"अध्यनरत हुं, पर यह मालूम हो चला है, में (आप भी) एक अनवरत और निरन्तर यात्रा पर है".
बेसिक सा रास्ता है, पर विरां है, अनाम है, सुदूर है, कठीन भी है और असंभव भी ! तो फिर संभव क्या है?
संभव है हम, और तुम !
जब महिनों की दैखभाल के बाद भी पौधे के फूल नहीं लगते तो वह उस पौधे के लिऐ असंभव है, पर आखिर हम इंतजार करते है, कुछ और पौधे उगायेंगै, जौ विकट था, वहीं विश्वास के फलित हौने तक इंतजार करेंगे !
अगर यात्रा शुरू हुई है, तो निरन्तर चलेंगे, अनवरत चलेंगे | कौई किसी के लिऐ टेढे मेढे रास्तों के सिवा कुछ नहीं छोडकर चलता | बस उन्ही पर दांये बांये पैर रखकर नई पगडंडियां बनाकर चलना है |
#शक्ति बारैठ
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