समाज सेवा का नाम हमारे भारत देश में नया नही है ये काम सदियों से हमारे देश में बखूबी बिना दिखावे के होता आया हैl समाज सेवा से मेरा तात्पर्य है के सच में उन लोगो की मदद करना जिनको जरूरत है, जिनके पास कुछ भी नही है, उनकी जिन्दगी में बदलाव लाने का नाम है समाज सेवाl लेकिन आज इस समाज सेवा जो की सोशल वर्क के नाम से प्रचलित हो चुकी है इसकी सच्चाई कुछ और ही हैl NGO स्वंयसेवी संस्था, गैर सरकारी संस्था, अलाभकारी संस्था का सही मायने में अर्थ होता है जो बिना अपने लाभ के, स्वार्थ के, मुनाफे के, निजी लाभ केकोई काम किसी जरूरतमंद के लिए किया जायेl
जाहिद अख्तर शेख़
जैसा की इनसे से हमारी बात हुई, जाहिद अख्तर शेख जयपुर जिले के फागी के निमेड़ा गाव के रहने वाले है और उन्होंने अपनी 12 वी तक की पढ़ाई लिखाई भी अपने गाव के सरकारी स्कूल में ही पूरी कीl परिवार में उनके बड़े पापा और पापा हमेशा गाव के लोगो के लिए किसी न किसी काम में साथ लगे रहते थे और गाव वालो की हर परेशानी में उनके घर वाले सेवा करने में लगे हुए रहतेl लेकिन तब उनको ये समझ नही थी के ये घरवाले क्या कर रहे है? समाज सेवा है क्या? स्कूल की पढाई खत्म होने के बादबिज़नस की डिग्री के लिए जयपुर आये, 3 साल बाद केंद्रीय विश्वविद्यालय राजस्थान के सोशल वर्क में एड्मिसन लिया और अपनी मास्टर डिग्री समाज कार्य में पूरी कीl जयपुर रहते हुए जाहिद ने जयपुर रंगमंच से जुड़े एक्टर, लेखक, कवी शक्ति बारेठ [ Shakti Bareth ] के साथ थियटर की बारीकियों को समझा और उनके साथ कार्य कियाl समाज के बदलते हुए आईने से साक्षात्कार होने ने बाद उनकी सोच बदली, समझ आया आखिर सोशल वर्क क्या हैl लेकिन इसी के साथ एकऔर नई चीज समझ आई के आज जो सोशल वर्क या समाज सेवा नही है, ये सिर्फ पैसा कमाने का एक बहुत ही बड़ा बिज़नस बन गया हैl अपनी मास्टर डिग्री के दौरान लगातार 1 साल तक विश्वविधालय के आस पास के गांवों में जाकर लोगो को समझने, उनकी जरुरतो के बारे में, सरकारी योजनाओं के बारे में, साथ ही लोगो की नजर में NGO नाम से एक अजीब से छवि देखीl NGO का मतलब समाज सेवा से होता है लेकिन लोगो से समझ आया के ये तो कुछ और करते हैl सिर्फ पैसे के लिए, उसी समय में हमारी सरकार ने देश के 30 हजार से अधिक NGO संस्थाओ को ब्लैक लिस्टेड कर दियाl जब 4-5 बड़े नाम वाले ngos के साथ ट्रेनिंग की तो इस फील्ड के बारे में थोडा और अच्छे से समझने लगे |
इसी में जब नैक्डोर संस्था में ट्रेनिंग में उत्तरप्रदेश में गया तब वहां दलितों के हालात देख कर एक अजीब सी उदासी मिली, लेकिन नैक्डोर से बहुत कुछ सिखा, समझा| जैसे ही पढाई पूरी हुयी बिहार के एक NGO में अच्छी जॉब मिली सोचा के अब बदलाव लाने का समय आ गया है, लेकिन वहां पर भी वैसा ही दिखावा होते देखा जो मेने पिछले 2 सालो से देखा और सुना था, इस बार में सब कुछ समाने से देख रहा थाl आज NGO ज्यादा कुछ नही एक अच्छी रिपोर्ट बनाकर आप अच्छा काम दिखा सकते हो और इसके लिए आपको ज्यादा कुछ नही बस थोड़ी अच्छी वाली अंग्रेजी में काम करना आना चाहिए, चाहे आपको फील्ड के बारे में कुछ भी न पता हो आपको अच्छी खासी नोकरी मिल जाएगीl और बस युही रिपोर्ट बनाने, प्रेजेंटेशन बनाने में ही काम खत्म हो जाता हैl रोजाना अपने सीनियर्स से किसी न किसी बात पे झगड़ा होता था क्युकी मुझे ऐसे काम नही करना था में हमेसा बोलता था के क्यूँ दिखावा कर रहे है हम काम कहा कर रहे है, लेकिन कोई सुनने को तेयार ही नही था,इनसबचीजोसे परेशान होकर मेने जॉब छोड़ने का फैसला लिया और कुछ वक्त के बाद मेने जॉब छोड़ दी |
कुछ वक्त अपना ही काम शुरू करने के लिए इधर उधर भागा बाद में समझ आया के अभी में इस काबिल नही बना के में खुद के पैरो पे कुछ कर पाउ| फिर उसके बाद मुझे और बारीखी से इस फील्ड को समजने के लिए फिर से एक 2 साल का ट्रेनिंग प्रोग्राम को ज्वाइन किया और मुझे उसमे उत्तराखंड के सुदूरवर्ती फील्ड में भेजा गया | वहां मेने एक अलग दुनिया देखी जिसमे एक तरफ प्राकर्तिक सोंदर्य था तो दूसरी तरफ पहाड़ी गावो में लोगो की रोजगार की समस्याये, पलायन, शराब और शिक्षा में लोगो का रुझान | सरकारी विद्यालयों की स्थिति हम सभी को पता है के लेकिन वह के प्राथमिक विद्यालयों में कई जगह बिल्डिंग, सिर्फ एक शिक्षक होना ऐसी समस्याओ का होना आम बात है फिर भी स्कूल में शिक्षक अपना काम कर रहे है जहा गरीब तबके के बच्चे पढ़ते है और कई बार शिक्षक उन बच्चो को पढ़ाने में रूचि नही दिखाते है और वो बच्चे स्कूल आकर भी पढ़ नही पाते हैl जिस ट्रेनिंग प्रोग्राम के अंतर्गत हम स्कूल के बच्चो के सोचने, समझनेऔर उसके शिक्षा के साथ साथ बाहरी समझ के लिए काम कर रहे हैl जाहिद अब आगे आने वाले समय में खुद अपना एक संस्था बनाकर उन जरूरतमंद लोगो की मदद करना चाहते है जिनको कही से भी सहायता नही मिल पाती है, उनको भी समाज के बदलाव में शामिल करना चाहते हैl
पूरी न्यूज़ यहाँ पढ़ें - http://tz.ucweb.com/8_G3MO
इसी में जब नैक्डोर संस्था में ट्रेनिंग में उत्तरप्रदेश में गया तब वहां दलितों के हालात देख कर एक अजीब सी उदासी मिली, लेकिन नैक्डोर से बहुत कुछ सिखा, समझा| जैसे ही पढाई पूरी हुयी बिहार के एक NGO में अच्छी जॉब मिली सोचा के अब बदलाव लाने का समय आ गया है, लेकिन वहां पर भी वैसा ही दिखावा होते देखा जो मेने पिछले 2 सालो से देखा और सुना था, इस बार में सब कुछ समाने से देख रहा थाl आज NGO ज्यादा कुछ नही एक अच्छी रिपोर्ट बनाकर आप अच्छा काम दिखा सकते हो और इसके लिए आपको ज्यादा कुछ नही बस थोड़ी अच्छी वाली अंग्रेजी में काम करना आना चाहिए, चाहे आपको फील्ड के बारे में कुछ भी न पता हो आपको अच्छी खासी नोकरी मिल जाएगीl और बस युही रिपोर्ट बनाने, प्रेजेंटेशन बनाने में ही काम खत्म हो जाता हैl रोजाना अपने सीनियर्स से किसी न किसी बात पे झगड़ा होता था क्युकी मुझे ऐसे काम नही करना था में हमेसा बोलता था के क्यूँ दिखावा कर रहे है हम काम कहा कर रहे है, लेकिन कोई सुनने को तेयार ही नही था,इनसबचीजोसे परेशान होकर मेने जॉब छोड़ने का फैसला लिया और कुछ वक्त के बाद मेने जॉब छोड़ दी |
कुछ वक्त अपना ही काम शुरू करने के लिए इधर उधर भागा बाद में समझ आया के अभी में इस काबिल नही बना के में खुद के पैरो पे कुछ कर पाउ| फिर उसके बाद मुझे और बारीखी से इस फील्ड को समजने के लिए फिर से एक 2 साल का ट्रेनिंग प्रोग्राम को ज्वाइन किया और मुझे उसमे उत्तराखंड के सुदूरवर्ती फील्ड में भेजा गया | वहां मेने एक अलग दुनिया देखी जिसमे एक तरफ प्राकर्तिक सोंदर्य था तो दूसरी तरफ पहाड़ी गावो में लोगो की रोजगार की समस्याये, पलायन, शराब और शिक्षा में लोगो का रुझान | सरकारी विद्यालयों की स्थिति हम सभी को पता है के लेकिन वह के प्राथमिक विद्यालयों में कई जगह बिल्डिंग, सिर्फ एक शिक्षक होना ऐसी समस्याओ का होना आम बात है फिर भी स्कूल में शिक्षक अपना काम कर रहे है जहा गरीब तबके के बच्चे पढ़ते है और कई बार शिक्षक उन बच्चो को पढ़ाने में रूचि नही दिखाते है और वो बच्चे स्कूल आकर भी पढ़ नही पाते हैl जिस ट्रेनिंग प्रोग्राम के अंतर्गत हम स्कूल के बच्चो के सोचने, समझनेऔर उसके शिक्षा के साथ साथ बाहरी समझ के लिए काम कर रहे हैl जाहिद अब आगे आने वाले समय में खुद अपना एक संस्था बनाकर उन जरूरतमंद लोगो की मदद करना चाहते है जिनको कही से भी सहायता नही मिल पाती है, उनको भी समाज के बदलाव में शामिल करना चाहते हैl
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