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Shakti Bareth-घर का मोल (डॉ प्रेम दान चारण की गजल)

Shakti Bareth-हुई ताख़ीर तो कुछ बाइस-ए-ताख़ीर भी था-मिर्ज़ा गालिब

Shakti Bareth-है बस कि हर इक उनके इशारे में निशाँ और-मिर्ज़ा गालिब

Shakti Bareth-कलकत्ते का जो ज़िक्र किया तूने हमनशीं-मिर्ज़ा गालिब

Shakti Bareth-फिर इस अंदाज़ से बहार आई -मिर्ज़ा गालिब

Shakti Bareth-एक एक क़तरे का मुझे देना पड़ा हिसाब_ गालिब

तुमसे प्यार करता हूँ:-- Shakti Bareth