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एक कविता - रात यों कहने लगा मुझ से गगन का चाँद - रामधारी सिंह दिनकर - संकलन शक्ति बारैठ

मैं ढूँढता तुझे था, जब कुंज और वन में - कवि रामनरेश त्रिपाठी - संकलन शक्ति बारैठ